महात्मा बुद्ध
विषय :- महात्मा बुद्ध
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गौतम बुद्ध से महात्मा बुद्ध किसने बनाया?
करना पड़ा भौतिक सुख का त्याग।
लिखा ही था उनकी कुण्डली में, बनेंगे बैरागी, बहुत नाम होगा। पूजेगी दुनिया सारी
समय के साथ साथ युवराज सिद्धार्थ हुए वयस्क। शादी हुई। फिर भी ना जानें, दिल में था क्या, किस की तलाश जारी थी।
मनुष्य इतना दुःखी और परेशान क्यों है?
इन्हीं सवालों का जवाब ढूंढने निकल पड़े महल से बाहर।
पत्नी, पुत्र, धन और वैभव को छोड़ निकल पड़े, सत्य की तलाश में।
जंगल जंगल घूमे बहुत।
वर्षों की साधना के बाद (गया ) बिहार में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हे ज्ञान की प्राप्ति हुई।
तब वे सिद्धार्थ गौतम से महात्मा बुद्ध कहलाए।
उन्हे बौद्ध हुआ अपने ही अन्दर। ज्ञान के पट खुल गए और वे महात्मा बुद्ध कहलाए।
उनके विचारों को नमन करें ।
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गौतम बुद्ध जन्म (लुंबिनी में ५६३) ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंश क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था।
माता का नाम (महामाया) था
सिद्धार्थ*गौतम बुद्ध से पहले था नाम।
विवाह उपरान्त अपने नवजात शिशु*राहुल*को और अपनी पत्नि (यशोधरा) को त्याग कर संसार को जरा, मरण, दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग और सत्य दिव्य ज्ञान की खोज में रात्रि को राजपाठ का मोह त्याग कर वन की ओर चले गए।
वर्षों की कठोर तपस्या साधना के बाद (बौद्ध गया (बिहार) में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई।
और वे सिद्धार्थ गौतम से भगवान बुद्ध बन गए।
बुद्ध निर्वाण की यही तिथि सिद्ध होती है। अलग अलग इतिहासकार तिथि क्रम बताते हैं।
गौतम बुद्ध को तथागत भगवान और बुद्ध क्यूं कहते हैं?
गौतम बुद्ध को अनेक नाम से पुकारा जाता है लेकिन तीन नाम सबसे ज्यादा लोकव्यवहार में हैं।
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१*तथागत**दो शब्दों से मिलकर बना है।
तथ्य+आगत**तथागत
तथ्य —(सत्य (सच्चाई)
आगत —अवगत (सचेत, आगाह करना)
अर्थात तथ्य के साथ सच्चाई से अवगत करने वाले बुद्ध तथागत कहे जाते हैं।
बुद्ध का अनुसरण करने वाले उन्हें भगवान बुद्ध भी कहते हैं।
गौतम बुद्ध को बुद्ध क्यों कहते हैं?
बुद्ध शब्द मन की ऐसी अवस्था या स्थिति का नाम है जो चित का ऐसा भाव होता है जो मानसिक उन्नति के सबसे ऊंचे स्थान पर पहूंच चुका है, बुद्ध का अर्थ सही ज्ञान।
जो ज्ञान संसार की भलाई कर सकता है।
ज्ञानवान (जिसे आत्म बौद्ध हो जाय)।
बुद्ध दुनिया को अहिंसा, करुणा और समर्पण पूरे विश्व को शान्ति का सन्देश देने के लिए जानें जाते हैं।
बुद्ध कहते हैं कि आप अगर कितने पवित्र शब्द बोल लें परन्तु जब तक हम उन शब्दों को अपने जीवन में उतार (अम्ल) नही करेगे कोई फायदा नहीं है।
चाहे कितनी ही पुस्तके पढ़े, पर फायदा होने वाला नहीं है।
उन विचारों को अपने जीवन में उतारने की जरूरत है।
बेकार के बाद विवादों से बचे । उनसे दूर रहें।
एकता की भावना सद्विचार और इंसानियत का विकास करें।
बुद्ध के अनुसार हमें अपने मन पे विजय पानी आनी चाहिए।
बुद्ध कौन है?
जो बौद्ध कराए कि क्या सही है और क्या गलत।
बुद्ध बनने के लिए तपना पड़ता है कहीं हम अपने ही बुद्ध बनते हैं।
एक आदर्श स्थापित करना होता है।
जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करें! और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपनी उस यात्रा को अच्छे से सम्पन्न करे।
बुराई से बुराई कभी ख़त्म नहीं होती।
भूतकाल में मत उलझो।
भविष्य के सपनों में मत खड़े रहो।
वर्तमान पे ध्यान दें।
एक ये ही मार्ग है, जो हमें अन्दर से शक्ति की ओर ले जाता है।
चित भी शांत हो जाता है।
ये ही सत्कर्म मनुष्य को (बुद्ध) बनाते हैं।
तभी वे तथागत भगवान कहलाए। सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण किया और गौतम से महात्मा बुद्ध कहलाए।
बुद्धम शरणम गच्छामि
संघम शरणम गच्छामि
धम्मम शरणम गच्छामि।।
स्वैच्छिक रचना लेख
🙏🌺🌺🌺🌺
गीता ठाकुर दिल्ली से
प्रतियोगिता हेतु
hema mohril
22-May-2024 01:17 PM
Amazing
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